LawPaw

स्टार्टअप व फ़ाउंडर्स के लिए कानूनी मदद — रजिस्ट्रेशन से फ़ंडिंग तक

पहले दिन से कानूनी नींव मज़बूत रखें — ताकि सह-संस्थापक विवाद, कंप्लायंस की कमी या ख़राब निवेशक शर्तें बाद में स्टार्टअप को नुक़सान न पहुँचाएँ।

2 कामकाजी घंटों में कॉल बैक शुरू से अंत तक एक कोऑर्डिनेटर सारी फ़ीस पहले से तय सत्यापित विशेषज्ञ

चरण 1 / 2

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स्टार्टअप व फ़ाउंडर्स

आम स्थितियाँ जिन्हें हम संभालते हैं

LawPaw का वादा

बिना झंझट, तेज़ और पूरी पारदर्शिता

2 कामकाजी घंटों में कॉल बैक

कामकाजी घंटों में (सोमवार–शनिवार, सुबह 9 से रात 8 बजे)। गिरफ़्तारी या ज़मानत जैसे ज़रूरी मामलों को प्राथमिकता।

शुरू से अंत तक एक कोऑर्डिनेटर

एक ही व्यक्ति जो आपका मामला जानता है — न बार-बार कहानी दोहराना, न किसी के पीछे भागना।

हर फ़ीस पहले से बताई जाती है

LawPaw की सुविधा शुल्क, विशेषज्ञ की फ़ीस और सरकारी शुल्क — भुगतान से पहले लिखित में। कोई छुपा शुल्क नहीं।

केवल सत्यापित विशेषज्ञ

किसी को भी आपके मामले पर लगाने से पहले बार काउंसिल, ICAI या ICSI नामांकन की जाँच।

संतुष्ट नहीं? बदल देंगे

विशेषज्ञ से संतुष्ट नहीं हैं तो कोऑर्डिनेटर को बताइए, हम दूसरे की व्यवस्था में मदद करेंगे।

ज़रूरत हो तो घर पर

दस्तावेज़ पिकअप, हस्ताक्षर, नोटरी और ई-स्टांप डिलीवरी आपके घर या ऑफ़िस पर।

कोई भी ईमानदार सेवा कोर्ट केस के नतीजे की गारंटी नहीं दे सकती — लेकिन हर कदम पर हमारे साथ की गारंटी है।

सवाल-जवाब

लोग अक्सर पूछते हैं

कंपनी रजिस्ट्रेशन में कितना समय लगता है?+

दस्तावेज़ तैयार हों तो आम तौर पर एक से दो हफ़्ते, नाम की मंज़ूरी और MCA प्रक्रिया पर निर्भर।

फ़ाउंडर्स एग्रीमेंट कब साइन करें?+

जितनी जल्दी हो सके — आदर्श रूप से इनकॉर्पोरेशन के आसपास — जब सब सहमत हों और कुछ दाँव पर न हो।

DPIIT मान्यता किसे मिल सकती है?+

आम तौर पर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, LLP या रजिस्टर्ड पार्टनरशिप फ़र्म जो 10 साल तक पुरानी हो, हर साल टर्नओवर ₹100 करोड़ से कम हो, और नवाचार या विस्तार योग्य बिज़नेस मॉडल पर काम कर रही हो।

क्या भारत में प्राइवेसी पॉलिसी अनिवार्य है?+

हाँ। ऑनलाइन व्यक्तिगत डेटा लेने वाले व्यवसायों को प्राइवेसी पॉलिसी प्रकाशित करनी होती है, और DPDP अधिनियम विस्तृत नोटिस व सहमति की शर्तें जोड़ता है।

क्या भारत में नॉन-कम्पीट शर्तें लागू होती हैं?+

नौकरी के बाद की नॉन-कम्पीट शर्तें भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 27 के तहत आम तौर पर लागू नहीं होतीं, लेकिन गोपनीयता और नॉन-सॉलिसिटेशन शर्तें लागू हो सकती हैं।

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