पुलिस व आपराधिक मामले — FIR, ज़मानत व चेक बाउंस केस
आपराधिक मामलों में हर घंटा मायने रखता है। गिरफ़्तारी या ज़मानत जैसे ज़रूरी मामलों को हमारे कोऑर्डिनेटर प्राथमिकता देते हैं।
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अपनी स्थिति के बारे में बताइए
माइक दबाइए और बोलिए — जैसे किसी दोस्त को बताते हैं
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पुलिस व आपराधिक मामले
आम स्थितियाँ जिन्हें हम संभालते हैं
LawPaw का वादा
बिना झंझट, तेज़ और पूरी पारदर्शिता
2 कामकाजी घंटों में कॉल बैक
कामकाजी घंटों में (सोमवार–शनिवार, सुबह 9 से रात 8 बजे)। गिरफ़्तारी या ज़मानत जैसे ज़रूरी मामलों को प्राथमिकता।
शुरू से अंत तक एक कोऑर्डिनेटर
एक ही व्यक्ति जो आपका मामला जानता है — न बार-बार कहानी दोहराना, न किसी के पीछे भागना।
हर फ़ीस पहले से बताई जाती है
LawPaw की सुविधा शुल्क, विशेषज्ञ की फ़ीस और सरकारी शुल्क — भुगतान से पहले लिखित में। कोई छुपा शुल्क नहीं।
केवल सत्यापित विशेषज्ञ
किसी को भी आपके मामले पर लगाने से पहले बार काउंसिल, ICAI या ICSI नामांकन की जाँच।
संतुष्ट नहीं? बदल देंगे
विशेषज्ञ से संतुष्ट नहीं हैं तो कोऑर्डिनेटर को बताइए, हम दूसरे की व्यवस्था में मदद करेंगे।
ज़रूरत हो तो घर पर
दस्तावेज़ पिकअप, हस्ताक्षर, नोटरी और ई-स्टांप डिलीवरी आपके घर या ऑफ़िस पर।
कोई भी ईमानदार सेवा कोर्ट केस के नतीजे की गारंटी नहीं दे सकती — लेकिन हर कदम पर हमारे साथ की गारंटी है।
सवाल-जवाब
लोग अक्सर पूछते हैं
क्या FIR ऑनलाइन दर्ज हो सकती है?+
उत्तर प्रदेश और दिल्ली में वाहन या सामान चोरी जैसे कुछ अपराधों के लिए ई-FIR होती है। BNSS के तहत इलेक्ट्रॉनिक सूचना पर सूचनाकर्ता को तीन दिन में हस्ताक्षर करने होते हैं।
क्या अग्रिम ज़मानत स्थायी होती है?+
कोर्ट इसे बिना तय अंतिम तारीख़ के दे सकता है, लेकिन शर्तें लग सकती हैं और उल्लंघन पर रद्द हो सकती है।
क्या चेक बाउंस केस में समझौता हो सकता है?+
हाँ। यह अपराध कंपाउंडेबल है और कोर्ट किसी भी चरण में समझौते को बढ़ावा देते हैं।